9 नवंबर 2019 - 13:39
क्या नैटो मौत के बिस्तर पर पड़ा हुआ बीमार है जैसा फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा? पोम्पेयो सही कहते हैं कि नैटो विलुप्ति की कगार प

अरब जगत के विख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः पिछले दो दिनों में नैटो के भविष्य के बारे में दो बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आए और दोनों बयानों का कारण सीरिया में तुर्की का सैनिक हस्तक्षेप और उत्तरी सीरिया से अमरीकी सैनिकों का निष्कासन था। इन बयानों से यह भी पता चलता है कि कुछ ही वर्षों के भीतर चीन विश्व स्तर पर अमरीका का स्थान ले लेगा।

पहला बयान फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैकक्रां ने दिया। उन्होंने इकानामिस्ट पत्रिका को इंटरव्यू देते हुए कहा कि नैटो को ब्रेन हैम्रेज हो चुका है अब इस संस्था का अपने ऊपर कोई नियंत्रण नहीं और न अपने अंगों को वह संभाल पा रहा है।

दूसरा बयान अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने दिया। बर्लिन दीवार गिराए जाने की वर्षगांठ के कार्यक्रम में पोम्पेयो ने कहा कि नैटो को अब बहुत समय गुज़र चुका है, यह संस्था विलुप्ति की कगार पर है। ज़रूरी है कि यूरोपीय देश इस संस्था के ख़र्चे उठाने में हाथ बटाएं।

अमरीका और यूरोप के संयुक्त एजेंडे का नाकाम हो जाना, नैटो के सदस्य देशों के बीच उत्तरी सीरिया में तुर्की के सैनिक हस्तक्षेप के बारे में गहरा मतभेद, तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोग़ान का रूस से एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था ख़रीदने का फ़ैसला और नैटो की ओर से इस पर जताई जाने वाली आपत्ति को तुर्की द्वारा पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाना वह महत्वपूर्ण कारण हैं जिनसे नैटो के बिखरने की प्रक्रिया तेज़ हुई है। इसका भी वही अंजाम होने जा रहा है जो वार्सा संधि का हुआ था। दिसम्बर में लंदन में नैटो की शिखर बैठक भी इस प्रक्रिया को रोक नहीं पाएगी।

राष्ट्रपति ट्रम्प का अमरीका में सत्तासीन होना और यूरोपीय घटकों के साथ उनका अपमानजनक बर्ताव इसी तरह पूर्वी एशिया के इलाक़े पर उनका पूरी तरह ध्यान केन्द्रित कर देना इस प्रकार के बदलाव हैं कि जिनके नतीजे में फ़्रांस जैस देश का झुकाव रूस की ओर बढ़ा है और वह अमरीका से अलग हटकर यूरोप का स्वाधीन रक्षा सिस्टम बनाने की बात करने लगे हैं।

मैकक्रां ने अपने इंटरव्यू में एक महत्वपूर्ण सवाल किया कि अगर तुर्की के हस्तक्षेप के जवाब में सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद ने इसी तरह की जवाबी कार्यवाही का फ़ैसला कर लिया तो क्या अपने घोषणपत्र के पाचवें आर्टिकल के अनुसार नैटो तुर्की के साथ खड़ा होगा? मैकक्रां ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया क्योंकि उनको पता है कि जब वर्ष 2015 में तुर्की ने सीरिया की सीमा पर रूस का युद्धक विमान मार गिराया था और रूस से तुर्की की लड़ाई की संभावना बढ़ गई थी तो उस समय नैटो ने तुर्की को अकेला छोड़ दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि अर्दोग़ान ने रूस का ही दामन थाम लिया और रूस से एस-400  मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदने का सौदा भी कर लिया। दोनों देशों के बीच आर्थिक लेनदेन 100 अरब डालर से अधिक हो चुका है। उसी समय तुर्की ने नैटो के सहयोगियों से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था।

हमें नैटो की मौत पर कोई अफ़सोस नहीं है क्योंकि इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया और लीबिया सहित इस्लामी और अरब देशों में इस संगठन का रक्तपात हमारी आंखों के सामने है और हमें तो लगता है कि यह सीरिया और लीबिया की जनता का श्राप है जो नैटो का काम तमाम कर रहा है।